कोरोनावायरस का संक्रमण पूरे देश में तेजी से पांव पसार रहा है। इस बीच रविवार को कानपुर के हैलट को कोविड-19 अस्पताल से 6 तब्लीगी जमातियों को डिस्चार्ज किया गया।
डॉक्टरों ने ठीक होने वाले जमातियों के लिए तालियां बजाई और उन पर फूल बरसाए। जानलेवा संक्रमण से ठीक हुए जमातियों में 2 आफगानिस्तान के और 4 भारतीय है।
शुरूआत के दिनों इन जमातियों ने इलाज में डाक्टरों का सहयोग नहीं किया था और मेडिकल स्टॉफ से बदसलूकी की थी। लेकिन आज वहीं जमाती जब ठीक होकर अस्पताल से बाहर निकले तो उनके चहरे पर खुशी थी और डाक्टारों को ईश्वर का दर्जा दे रहे थे।
अफगानिस्तान के एक जमाती ने कहा कि डाक्टरों ने हमारा बहुत खिदमत किया वाकई भारत बहुत अच्छा है।
अभी इनको 14 दिनों तक क्वारैंटाइन में रखा जाएगा
डिस्चार्ज हुए जमातियों को पुलिस अभिरक्षा में अस्थाई जेल भेजा गया है। इन सभी जमातियों को 14 दिनों तक क्वारैंटाइन में रखा जाएगा है। दरसल दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से बड़ी संख्या में जमाती कानपुर की विभिन्न मस्जिदों में ठहरे थे। बाबूपुरवा की सुफ्फा मस्जिद में निजामुद्दीन मरकज से विदेशी जमात आकर ठहरी थी।
इसमें 6 आफगानिस्तान , एक यूके और एक इरानी थे। पुलिस ने इन जामातियों को पकड़ा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सैंपल लेकर जांच कराई थी। जिसमें दो आफगानिस्तानी जमाती संक्रमित पाए गए थे। इसके साथ ही अन्य मस्जिदों से पकड़े गए चार जमाती पकड़े गए थे।
हैलट अस्पताल के अधीक्षक आरके मौर्या के मुताबिक बीते 31 मार्च को हमारे पास 22 जमाती आए थे। जिसमें से 6 जमाती पॉजिटिव पाए गए थे। जिन्हे हैलट के कोविड-19 अस्पताल में भर्ती किया गया था।
हमने इनकी पूरी देखरेख की इनकों गाइड लाइन के अनुसार ट्रीटमेंट दिया गया। 14 दिन बाद इनके दो बार टेस्ट कराए , गाइड लाइन है उसमें दो टेस्ट निगेटिव होना चाहिए फिर हम लोग डिस्चार्ज करते है। इसके बाद भी 14 दिनों के लिए क्वारैंटाइन में रखा जाता है।
कहा कि इस बीच इन लोगों ने समझा है कि यह किस तरह की बिमारी है। हम लोग यहीं चाहते है कि ये लोग बाहर जाकर अपने साथियों यही मैसेज दें कि यह ठीक होने वाली बिमारी है इसे छिपाएं नहीं।
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