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Friday, 17 April 2020

काशी के मणिकर्णिका घाट पर 300 परिवारों के सामने संकट;

काशी के मणिकर्णिका घाट पर 300 परिवारों के सामने संकट; 

शवों के अंतिम संस्कार में मिले पैसे से ही चलती है इनकी रोजी-रोटी

उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन के चलते जहां दिहाड़ी मजदूरों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया है

वहीं दूसरी ओर काशी के मणिकर्णिका घाट पर शवों का अंतिम संस्कार कर अपना गुजर बसर करने वाले डोम राजा के परिवार और मुर्दा जलाने वाले लोगों से जुड़े 300 परिवार भी भूखमरी के कागार पर पहुंच गए हैं।

जहां पहले रोज करीब 100 शवों का अंतिम संस्कार होता था वो आज घटकर महज 25 तक सिमट गयी है।

लाकडाउन के चलते महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर डेडबॉडी आना बहुत कम हो गया है। ऐसे में डोमराजा परिवार और मुर्दा जलाने वाले के परिजनों में आर्थिक संकट गहराने लगा है। समाजसेवी और स्थानीय नेता अमीर चंद्र पटेल ने राजमाता की महाश्मशान पहुंचकर 1100 रुपए का आर्थिक मदद की।उनका कहना है कि 300 से ऊपर परिवार है।इनकी जीविका का साधन डेडबॉडी ही जलाना और जलवाना है।

राजमाता जमुना देवी ने बताया कि 22 तारीख के बाद से डेडबॉडी आना बहुत कम हो गया है। हम लोगों के परिवार में 3 से 4 महीने में पारी आती है। परिवार का निर्वहन करना काफी मुश्किल हो गया है। पारिवार के एक सदस्य माता प्रसाद ने बताया कि रोज करीब 100 डेडबॉडी आती थीं।

 लेकिन अब यह घटकर 20 से 25 तक पहुंच गई हैं। बाहर से आने वाले शवों को काशी की सीमा पर रोक दिया जा रहा है। ऐसे में अमीर चंद्र द्वारा सहायता भी हमारे लिए बहुत है

बताया जाता है कि डोमराजा के पूर्वजों ने ही राजा हरिश्चंद्र को अपने यहां कार्य दिया था। उसी समय राजा हरिश्चन्द्र ने ही इनके पूर्वजों को राज परिवार की उपाधि दी थी।

काशी के मणिकर्णिका घाट पर 300 परिवारों के सामने संकट;
समाजसेवी अमीर चंद्र पटेल ने राजमाता की महाश्मशान पहुंचकर 1100 रुपए का आर्थिक मदद की। कहा कि इससे संकट के इस समय में इन परिवारों को काकफी मदद मिलेगी।


source https://www.bhaskar.com

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