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Sunday, 29 March 2020

3 दिन में गैर राज्यों से आए 1.5 लाख लोग;

3 दिन में गैर राज्यों से आए 1.5 लाख लोग; 

सीएम बोले- इन्हें 14 दिनों के लिए क्वारैंटाइन किया जाएगा

 कोरोनावायरा के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन का आज 5वां दिन है। लेकिन चौथे दिन शनिवार को यह लॉकडाउन देश की राजधानी से लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक फेल नजर आया।

दिल्ली गेट से लखनऊ और फिर यहां पूर्वांचल व अन्य हिस्सों में लोगों को बसों का इंतजाम कर भेजा गया। अनुमान है कि, 3 दिन के भीतर गैर राज्यों से प्रदेश में 1.5 लाख आए हैं। इन लोगों को 14 दिनों के अनिवार्य क्वारैंटाइन में रहना होगा।

ग्राम निकायों को प्रवासियों की सूची बनाने का निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया है कि वे पिछले तीन दिनों में राज्य में लौटे 1.5 लाख प्रवासियों का पता लगाएं, उन्हें राज्य के शिविरों में रहने दें और उनके भोजन और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उनके नाम, पते और फोन नंबर इन अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं और उनकी निगरानी की जा रही है।

वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, इन सभी प्रवासी मजदूरों को 14 दिनों के लिए सरकारी शिविरों में रहना होगा। उन्हें अपने घरों में लौटने की अनुमति नहीं होगी। व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कल रात ग्राम प्रधानों को 65,000 से अधिक कॉल किए गए। नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। ग्राम निकायों को प्रवासियों की सूची तैयार करने के लिए भी कहा गया है।

देवरिया में हुई थर्मल स्कैनिंग

हालांकि, इस कवायद के बीच तमाम लोग अपने-अपने घरों को पहुंच चुके हैं। देवरिया में गैर राज्यों से आए मजदूरों की थर्मल स्कैनिंग हुई। उसके बाद उन्हें अपने गांवों में जाने की अनुमति दी गई। बस स्टेशनों भी मजदूरों को कतारबद्ध कर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम द्वारा स्कैन किया गया। उनके नाम, पते, फोन नंबर का डाटा तैयार किया गया। एक अधिकारी ने कहा- केवल उन्हीं लोगों क्वारैंटाइन किया जाएगा, जिनमें संदिग्ध लक्षण दिखेंगे। देवरिया में अब कोई संदिग्ध नहीं मिला है।

21 जिलों में बने आश्रय स्थल

अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने बताया कि अब तक 21 जिलों में 100 आश्रय स्थल बनाए जा चुके हैं। इन जिलों में संत कबीर नगर, भदोही, मीरजापुर, कौशांबी, कासगंज, जौनपुर, गोरखपुर, अमरोहा, चंदौली, कानपुर देहात, इटावा, फरुखाबाद, श्रवस्ती, चित्रकूट, महाराजगंज, हापुड़, मुजफ्फरनगर, मैनपुरी, बदायूं, लखीमपुर और रामपुर शामिल हैं। प्रदेश स्तर पर इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम की स्थापना राहत आयुक्त कार्यालय में की जा रही है। जिलों में भी स्थायी कंट्रोल रूम स्थापित करने के लिए हर जिले को 50 हजार रूपए आवंटित किए गए हैं।

बिहार मुख्यमंत्री ने कहा- 14 दिनों तक घर जाने की नहीं मिलेगी अनुमति

दिल्ली, मुंबई व राजस्थान से आने वाले तमाम मजदूर बिहार के रहने वाले हैं, जो यूपी के जरिए अपने अपने घरों को रवाना हुए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को सीमावर्ती जिलों में राहत शिविर स्थापित करने का आदेश दिया है। इन मजदूरों को 14 दिनों तक घर जाने की अनुमति नहीं होगी।

नीतीश कुमार ने कहा था- विशेष बसों से लोगों को राज्यों को वापस भेजने से लॉकडाउन का उलंघन होगा। इससे कोरोनावायरस के प्रसार में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा, लोगों को घर वापस भेजने की कोशिश के बजाय स्थानीय स्तर पर शिविरों का आयोजन करना बेहतर है। राज्य सरकार किसी के द्वारा आयोजित इन शिविरों की लागत की प्रतिपूर्ति करेगी

3 दिन में गैर राज्यों से आए 1.5 लाख लोग;
दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर लोगों की लगी भीड़।


source https://www.bhaskar.com

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