राम मंदिर मॉडल में अब कोई परिवर्तन अस्वीकार,
ट्रस्ट की घोषणा पर तय होगी विहिप की भूमिका
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद नौ नवंबर 2019 को श्रीराम जन्मभूमि विवाद का हल निकला था। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार को तीन माह का वक्त दिया था, जो नौ फरवरी 2020 को पूरा हो जाएगा। विहिप नए ट्रस्ट के घोषणा का इंतजार कर रही है। इसके बाद वह अपनी नई भूमिका तय करेगी। विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने यह भी कहा- 1989 में जो राम मंदिर का मॉडल बना था, उसमें अब कोई परिवर्तन होने वाला नहीं है।
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प्रयागराज में तय होगी भूमिका
विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा- राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब विहिप केंद्र सरकार के नए ट्रस्ट की घोषणा का इंतजार कर रही है। उसी के बाद वह अपनी नई भूमिका तय करेगी।
कहा कि प्रयागराज में होने वाली विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में संतों के निर्देश पर अगला कार्यक्रम तय होगा। विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय व आरएसएस के सह सरसंघकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने हाल ही में अपने अयोध्या दौरे में स्पष्ट कर दिया है कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मार्ग अब प्रशस्त हो गया। बाधाएं समाप्त है। अब निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
उन्होंने कहा- यह बात भी साफ है कि 1989 में राम मंदिर का जो माडल बना, वह संतों ने पूजित कर करोड़ों राम भक्तों के घर पहुंचाया। वह लोगों के मन में है। इस पर राम भक्तों की मुहर लग चुकी है। इसमें किसी तरह का परिवर्तन अब होने वाला नहीं है।
शर्मा ने बताया कि दोनों शीर्ष पदाधिकारियों ने तीन मंजिल के माडल की खबर को खारिज करते हुए साफ किया ऐसा सुझाव देने वालों को 1989 के पहले सुझाव रखना था, जब मंदिर आंदोलन के दौरान राम मंदिर का मॉडल बन रहा था। शर्मा ने कहा कि जो ढांचा 6 दिसम्बर को समाप्त हुआ, वह मंदिर का था और मंदिर के मलबे को मांगने वाले इस सत्य को अब स्वीकार कर लें।
दर्शन करने वालों को मिले सुविधा
प्रवक्ता ने कहा कि मंदिर निर्माण के साथ ही दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। सभी चाहते हैं कि अयोध्या का सर्वांगीण विकास हो, जिससे श्रद्धालुगण जो यहां राम लला का दर्शन करने आएं उन्हें यहां किसी तरह का कष्ट न उठाना पड़े।
मस्जिद निर्माण के लिए समय तय नहीं
शरद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मस्जिद निर्माण के लिए कोई समय नहीं दिया गया है। बस इतना कहा है कि सरकार मुस्लिम पक्ष को भूमि उपलब्ध करवाए। ऐसे में सरकार के ऊपर है कि वह सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को जमीन कहां और कब उपलब्ध करवाती है। विहिप की मस्जिद को लेकर शर्त पहले से तय हैं।
source https://www.bhaskar.com/uttar-pradesh

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