तब्लीगी जमात से लौटे इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफसर शाहिद सस्पेंड;
महामारी एक्ट में पुलिस ने भेजा था जेल
दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से लौटे विदेशी जमातियों को शरण देने व बार बार चेतावनी के बाद भी जानकारी छिपाने के आरोपी इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर मोहम्मद शाहिद को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रोफसर खुद भी जमात में शामिल हुए थे।
उनके खिलाफ प्रयागराज की शिवकुटी पुलिस ने महामारी एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उन्हें जेल भी भेज दिया था। इसके साथ ही खूफिया एजेंसियां भी उनका ब्यौरा जुटा रही हैं।
1988 में मिली थी नियुक्ति, 21 अप्रैल से निलंबन प्रभावी
मूलरूप से मऊ जनपद के दक्षिण टोला कोतवाली स्थित बुलाकी का पूरा निवासी प्रोफेसर शाहद वर्ष 1988 में इविवि के राजनीति विज्ञान विभाग में लेक्चरर नियुक्त हुए। 2003 में जेएनयू से पीएचडी की उपाधि हासिल करने के बाद 2004 में वह रीडर के पद पर पदोन्नत हुए।
2015 में प्रोफेसर नियुक्त किए गए। एएमयू, जेएनयू और जम्मू विवि में इनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। वहां के शिक्षकों को अक्सर वह बुलाते भी थे। प्रो. शाहिद के बड़े भाई प्रो. एसए अंसारी इविवि में वाणिज्य विभाग में और भांजा डॉ. कासिफ उर्दू विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
वर्तमान में शाहिद प्रयागराज के अस्थायी जेल में 16 विदेशी जमातियों समेत 29 लोगों के साथ बन्द हैं। इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के अनुसार उनका ये निलंबन 21 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा।
प्रोफसर की सिफारिश पर जमातियों को मस्जिद में मिली थी शरण
इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद पिछले महीने नई दिल्ली में हुई जमात में शामिल हुए थे। जमात से लौटने के बाद वह कई दिन यूनिवर्सिटी गए थे। दो दिन में उन्होंने तकरीबन साढ़े तीन सौ स्टूडेंट्स की परीक्षा भी ली थी।
इसके अलावा वह कई शिक्षकों, कर्मचारियों और बाहरी लोगों से भी मिले थे। सरकार और प्रशासन की अपील के बावजूद प्रोफेसर शाहिद ने जमात में शामिल होने की बात छिपाकर रखी थी। उन्हें 8 अप्रैल की रात को पुलिस ने घर से पकड़कर क्वारैंटाइन सेंटर भेजा था।
शाहिद ने ही इंडोनेशिया से आए आठ विदेशी समेत नौ जमातियों को प्रयागराज की अब्दुल्ला मस्जिद में छिपकर रहने में मदद की थी। उनकी सिफारिश पर ही इन नौ जमातियों को मस्जिद में जगह मिली थी।
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