एंटी सीएए आरोपियों की होर्डिंग पर हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला,
बेंच ने इसे निजता का उलंघन माना था
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपियों की होर्डिंग्स लगाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट आज दोपहर दो बजे अपना फैसला सुनाएगा।रविवार को अवकाश के दिन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर व जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
बेंच ने अफसरों से कहा- किस कानून के तहत लखनऊ की सड़कों पर इस तरह के पोस्टर सड़कों पर लगाए गए? उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर संबंधित व्यक्ति की इजाजत के बिना उसका फोटो या पोस्टर लगाना गलत है। यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
होर्डिंग में शामिल लोग बोले- मॉब लिंचिंग का खतरा
जिन लोगों के होर्डिंग लगाए गए उनमें आईपीएस एसआर दारापुरी, एक्टिविस्ट सदफ जफर और दीपक कबीर शामिल हैं। कबीर ने कहा- सरकार डर का माहौल बना रही है। होर्डिंग में शामिल लोगों की कहीं भी मॉब लिंचिंग हो सकती है। दिल्ली हिंसा के बाद माहौल सुरक्षित नहीं रह गया है। सरकार सबको खतरे में डालने का काम कर रही है।
57 लोगों को 88 लाख की रिकवरी का नोटिस
19 दिसंबर, 2019 को जुमे की नमाज के बाद लखनऊ के ठाकुरगंज, हजरतगंज, कैसरबाग और हसनगंज थाना क्षेत्र में तोड़फोड़ करने वालों ने कई गाड़ियां भी जला दी थीं। राज्य सरकार ने नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से कराने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने फोटो-वीडियो के आधार पर 150 से ज्यादा लोगों को नोटिस भेजे।
जांच के बाद प्रशासन ने 57 लोगों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी माना। प्रशासन ने 5 मार्च की रात को 57 आरोपियों के नाम, पते और तस्वीर वाले होर्डिंग लगा दिए। इनसे करीब 88 लाख रुपए के नुकसान की भरपाई कराने की बात कही गई। लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश ने कहा था- अगर तय वक्त पर इन लोगों ने जुर्माना नहीं भरा, तो इनकी संपत्ति की कुर्की की जाएगी।
source https://www.bhaskar.com

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