धोखाधड़ी के मुकदमे में सांसद आजम खां, उनकी पत्नी विधायक डॉ. तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला की अब रामपुर जेल में पेशी नहीं होगी। सीतापुर जेल से ही तीनों की पेशी अब वीडियो कांफ्रंसिंग के माध्यम से ही होगी।
इस पर एमपीएमएलए कोर्ट ने यह निर्देश दिया है। दरअसल, आचार संहिता उल्लंघन के दो मामलों में सांसद आजम खां की कोर्ट में पेशी हुई। उन्हें कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया जाएगा। यहां उनके खिलाफ आचार संहिता के दो मुकदमों की सुनवाई हुई। इसके अलावा क्वालिटी बार मामले में जमानत अर्जी पर बहस हुई, जो पूरी हो गई। अब इस पर फैसला होना बाकी है।
बेटे अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में सपा सांसद आजम खां, उनकी पत्नी विधायक डॉ. तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद 26 फरवरी को रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में तीनों ने आत्मसपर्ण किया था। जिला प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से तीनों को सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया है। वहां से तीनों को पेशी पर कड़ी सुरक्षा में लाया जाता है
पहली बार सांसद, उनकी पत्नी और बेटे को पेश किया गया था। दूसरी बार सांसद और बेटे की पेशी हुई थी और गुरुवार को अकेले सांसद की पेशी हुई। हर बार पेशी पर सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी। ऐसे में इनकी पेशी सीतापुर जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कराने पर विचार किया जा रहा था, जिसको अदालत ने मंजूर कर लिया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राम औतार सिंह सैनी ने बताया कि अब अगली पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही होगी। इस संबंध में एमपी एमएलए कोर्ट ने आदेश भी कर दिए हैं। इसके बाद सांसद को सीतापुर जेल भेज दिया गया है।
आचार संहिता के दो मामलों में सीतापुर जेल से पेश हुए सांसद आजम
सांसद आजम खां के खिलाफ आचार संहिता के जिन दो मुकदमों में सुनवाई हुई, उनमें एक मामला स्वार कोतवाली क्षेत्र का है। 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान आजम खां ने स्वार क्षेत्र में रोड शो किया था। रोड शो के लिए प्रशासन से अनुमति ली गई थी।
आरोप है कि अनुमति में दिए गए समय से अधिक देर तक रोड शो निकाला गया था। इस पर पुलिस ने चार अप्रैल को आजम खां और सपा जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार के खिलाफ स्वार कोतवाली में आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज किया था।
दूसरा मामला शहजादनगर थाना क्षेत्र का है। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान यहां एक जनसभा में सांसद ने असंवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए अशोभनीय टिप्पणी की थी, जिस पर उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज किया था।
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