Featured Posts

Breaking

Monday, 2 March 2020

3 साल पहले लकवे के कारण डॉक्टर ने कुश्ती छोड़ने को कहा था,

3 साल पहले लकवे के कारण डॉक्टर ने कुश्ती छोड़ने को कहा था, 

अब ओलिंपिक क्वालिफायर में पहुंचीं सोनम

इरादे हों मजबूत तो कोई भी मुकाम हासिल करना मुश्किल नहीं होता- रेसलिंग कोच अजमेर मलिक की ये बात उनकी ट्रेनी सोनम मलिक पर फिट बैठती है। 18 साल की युवा पहलवान सोनम ने ओलिंपिक क्वालिफायर के लिए हुए ट्रायल में रियो ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट साक्षी मलिक को हराकर सभी को हैरान कर दिया।

 ये जीत इतनी बड़ी थी कि खुद सोनम ने कोच से पूछ लिया था कि क्या हो गया है कोच साहब। अजमेर इतने खुश थे कि उनके पास शिष्या को समझाने के लिए शब्द ही नहीं थे, उन्होंने उसे गले से लगा लिया। सोनम अब 62 किग्रा वेट कैटेगरी में टोक्यो ओलिंपिक क्वालिफायर में हिस्सा लेंगी। यहां फाइनल में पहुंचने वाली पहलवान को टोक्यो का टिकट मिलेगा।

रेसलर सोनम वेजिटेरियन हैं, रोजाना 6 घंटे अभ्यास करती हैं

सोनम के कोच अजमेर मलिक ने बताया, ‘2017 में अभ्यास के दौरान उसे चोट आई और वो शिकायत करने लगी कि उसका हाथ काम नहीं कर रहा है। हमने इलाज कराया, लेकिन वो काम नहीं आया। उसके कंधे की नस दब गई थी। जब डॉक्टर को दिखाया तो उसने कहा कि सोनम पैरालाइज हैं और अगर उन्हें फिर से मैट पर उतारा तो उसकी पूरी बॉडी भी पैरालाइज हो सकती हैं।

कई महीने तक सोनम ने अभ्यास नहीं किया और 6 महीने के बाद उसने डॉक्टर को हैरान करते हुए कमबैक किया। वापसी के समय वे पूरी तरह से फिट थीं और डॉक्टर खुद उनकी रिकवरी को मिरेकल मानते हैं।’

सोनम के इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे

अजमेर ने कहा, ‘हमारे पास सोनम के इलाज के लिए ज्यादा पैसे नहीं थे। उसके पिता एक मिल में काम करते हैं और इलाज काफी महंगा था। हमने सोनम के लिए देसी इलाज अपनाया और उससे सोनम को मदद भी मिली।

 2018 में सोनम ने वर्ल्ड कैडेट रेसलिंग में ब्रॉन्ज जीता और 2019 में वे इसी चैंपियनशिप से गोल्ड मेडल लेकर लौटीं। सोनम अभी युवा है और वे अपने बेस्ट दांव कभी नहीं छोड़ती और उसके दम पर किसी को भी पस्त कर सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘सोनम वेजिटेरियन है और सिर्फ दूध-घी के दम पर ही अभी तक यहां का सफर तय किया है।

वे सुबह और शाम दोनों सेशन में वो तीन-तीन घंटे तक अभ्यास करती है। इसमें उसे पावर, टेक्नीक, फाइट, एंड्यूरेंस का अभ्यास करते हुए अपनी फिटनेस व स्पीड पर भी फोकस करना होता है। उनकी ताकत दांव खेंच और अंटी है। इसमें वो पूरी ताकत के साथ रेसलर को अपनी ओर खींचती है, तब विपक्षी रेसलर कुछ समझ नहीं पाता। वो टोक्यो ओलिंपिक में मेडल जीतने का दम रखती है।’

3 साल पहले लकवे के कारण डॉक्टर ने कुश्ती छोड़ने को कहा था,
कोच अजमेर मलिक के साथ सोनम। रेसलर ने 2018 और 2019 में वर्ल्ड कैडेट चैम्पियनशिप में मेडल जीते।

https://ift.tt/32F6ri1

No comments:

Post a Comment

आप  https://www.muchtoknow.in   पर जाकर सभी समाचार देख तथा पढ़ सकते हैं I