नियमों की अवहेलना और जालसाजी के मामले में 2 पूर्व कुलपितयों समेत 5 के खिलाफ केस दर्ज,
नियुक्ति में धांधली का आरोप
राजधानी में स्थितलखनऊ विश्वविद्यालय में अप्लाइड इकॉनमिक्स में प्रवक्ता के पद पर फर्जी नियुक्ति के मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है। नियमों की अवहेलना कर जालसाजी से नियुक्ति के मामले में लखनऊ यूनिवर्सिटी के 2 पूर्व कुलपतियों समेत 5 पर एफआईआर दर्ज की गई है।हसनगंज थाने में डॉ प्रशांत पांडेय ने ये एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें पूर्व कुलपति एसपी सिंह, आरपी सिंह, पूर्व कुलसचिव अनिल दमेले, वर्तमान कुलसचिव एसके शुक्ला पर एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा कविता चतुर्वेदी समेत अन्य पर भी एफआईआर हुई है।
धोखाधड़ी, जालसाज़ी की धाराओं में ये एफआईआर दर्ज की गई है,जिसमें कहा गया है कि लखनऊ यूनिवर्सिटी में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जालसाजी कर मनवांछित लोगों को प्रवक्ता के पद पर चयन का रैकेट चलाया गया।
इसमें कविता चतुर्वेदी को बिना किसी अर्हता के नियुक्ति दी गई। यही नहीं कविता की नियुक्ति को सही ठहराने के लिए एलयू के अधिकारियों ने दस्तावेजों में हेरफेर की। प्रशांत पांडेय के अनुसार आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना को देने से इंकार किया गया।
यह है मामला
अमीनाबाद के व्यवसायी की बहु कविता चतुर्वेदी की नियुक्ति में एलयू में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। 2006 में लविवि में अप्लाइड इकॉनमिक्स में प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति निकली थी, जिसमें प्रशांत ने भी आवेदन किया था।नियुक्ति के समय कविता को पीएचडी होल्डर बताया गया था, लेकिन वह उस समय पीएचडी होल्डर नहीं थीं। उस समय नियुक्ति में उन्होंने जो डॉक्युमेंट्स दिए थे, उनके आधार पर नियुक्ति मिल गई थी। वहीं, जुलाई में कविता ने दोबारा नया पीएचडी सबमिशन डॉक्युमेंट दिया था, जो नियम विरुद्ध था।
source https://www.bhaskar.com

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