काशी-मथुरा में धर्माचार्य हुए ऑनलाइन,
अयोध्या लॉकडाउन में सूनी पड़ी
उत्तर प्रदेश के 3 धार्मिक शहर जहां हर रोज अलग-अलग राज्यों से डेढ़ से दो लाख श्रृद्धालु आते हैं। आजकल सूने पड़े हुए हैं। कोई राम के दर्शन को आता तो कोई बाबा को दूध चढ़ाने तो कोई कृष्ण की भक्ति में सराबोर होकर पहुंचता था,लेकिन लॉकडाउन ने भक्तों को अपने आराध्य से दूर कर दिया है। यह अलग बात है कि लॉकडाउन का दूसरा फेज शुरू होने से पहले काशी और मथुरा में धार्मिक हलचल शुरू हो गई।
प्रमुख मंदिरों के कपाट तो श्रृद्धालुओं के लिए बंद ही हैं, लेकिन स्थानीय धर्माचार्य ऑनलाइन भक्तों को ज्ञान वचन और तमाम जानकारी दे रहे हैं।
मथुरा में ऑनलाइन सुनाई जा रही है हरी कथा
मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान और वृन्दावन में बांके बिहारी के दर्शन के लिए लोग देश विदेश से आते हैं। लॉकडाउन के समय यहां के धर्माचार्य भगवान की आरती हर रोज कर रहे हैंलेकिन, अब भक्तों की भीड़ नहीं होती है। वहीं, भक्त भी घरों में बैठे हैं और भगवान के द्वार पर आने की बाट जोह रहे हैं। मथुरा के धर्माचार्यों ने इसके लिए सत्संग का तरीका निकाला है।लॉकडाउन में मानसिक शांति के लिए सत्संग करने को धर्माचार्यों के लिए सोशल मीडिया एक कारगर हथियार साबित हो रहा है। धर्माचार्य फेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सएप और फेसबुक लाइव के माध्यम से धर्मप्रेमियों को श्री हरिकथा का लाभ करवा रहे हैं। इतना ही नहीं धर्माचार्य नकारात्मकता की तरफ बढ़ रहे लोगों की जिज्ञासा को भी प्रश्नोत्तरी के माध्यम से शांत कर रहे हैं।
लॉकडाउन की वजह से लगातार घर में रहने से लोगों के मानसिक अवसाद में जाने का अंदेशा भी होने लगा है। इस दौरान ज्यादातर लोगों का समय इंटरनेट पर ही व्यतीत हो रहा है। लोगों की इसी आदत को युवा धर्माचार्यों ने अपना हथियार बनाया और यह तरीका कारगर साबित भी हो रहा है। सोशल नेटवर्किंग के द्वारा लोगों को कनेक्ट किया जाने लगा।
धर्माचार्य मानते हैं कि धर्म भारत की जीवन धुरी है। इसके माध्यम से समाज को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। ऐसे समय में जब माहौल नकारात्मक हो रहा है। तब भगवद कथा ही सार्थक प्रयास है।

काशी में व्हाट्सअप, फेसबुक के जरिए से लोग गंगा आरती में शामिल हो रहे
लॉकडाउन की वजह से काशी में सभी मंदिर बंद हैं। भक्तों के कष्टों को देखते हुए कुछ मंदिरों में ऑनलाइन दर्शन पूजन भी कराया जा रहा है। अनुष्ठान को संक्षिप्त करके वॉट्सएप या फेसबुक के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, दशाश्मेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध आरती का गंगा सेवा निधि रोज फेसबुक से लाइव कर रहा है।
बटुक भैरव मंदिर के महंत जितेंद्र मोहन पुरी ने बताया कि बहुत से भक्तों का ऑनलाइन संकल्प लिया जा रहा है। उनके अनुष्ठान और बाबा का दर्शन पूजन लाइव करा दिया जा रहा है। भारत के तमाम जगहों से लोग बाबा का दर्शन करना चाहते हैं।
मंदिर का मुख्य द्वार लॉकडाउन में बन्द है।वहीं, गंगा सेवा निधि द्वारा एक ब्राह्मण रोज गंगा आरती और पूजन करता है। इसको ऑनलाइन भक्तों तक पहुंचाया जाता है। लोकल लेबल पर रोज वाट्सएप पर फोटो वीडियो तमाम ग्रुपों में सेंड कर दिया जाता है।
महंत जितेंद्र मोहन पूरी ने बताया कि बहुत से लोग कुंडली और ग्रहों को लेकर सवाल करते हैं। उनको घर पर कैसे पूजन और कैसे, किन मन्त्रो के साथ किया जाए, बताया जा रहा है।वहीं, काशी विश्वनाथ मंदिर लाइव दर्शन पर कोई भी कहीं से दर्शन कर सकता है।
अयोध्या में है सन्नाटा, ऑनलाइन की भी नहीं है व्यवस्था
लॉकडाउन के दौरान पिछले 3 हफ्ते से अयोध्या के मंदिर श्रद्धालुओं से पूरी तरह से कट गए हैं। यहां पर राग भोग आरती पूजा के कार्यक्रम मंदिर के अंदर ही हो रहे हैं लेकिन उनको श्रद्धालु देख नहीं पा रहे हैं। ऑनलाइन इसकी कोई व्यवस्था प्रसारण कि नहीं की गई है।
वशिष्ठ भवन मंदिर के महंत और प्रमुख संत डॉ राम विलास वेदांती ने मांग की है की प्रशासन अयोध्या के मंदिरों के धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम का भी एक पोर्टल तैयार करे। इसमें मंदिरों में हो रहे धार्मिक अनुष्ठान, आरती पूजा के कार्यक्रमों को अपलोड करके जनता के बीच पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा रामनवमी से लेकर इस बीच पड़ने वाले तमाम पर्व और त्योहार लॉकडाउन के चलते सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं। ऐसे में मंदिरों में निवास करने वाले पुजारी और साधु ही इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। रोजाना नियमित हनुमानगढ़ी कनक भवन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का दर्शन करने वाले लोग इसे देखते से वंचित रह जा रहे हैं।
डॉ. वेदांती ने कहा कि अयोध्या में करीब 4000 छोटे मंदिर है। जहां पर भंडारा और साधुओं के भोजन और रहने की व्यवस्था रामनवमी या अन्य बड़े मेले में चढ़ने वाले चढ़ावा से पूरा होता है। इस बार यह चढ़ावा कोरोना संकट के कारण ना के बराबर ही है। इसके कारण मंदिरों में रहने वाले तमाम साधुओं के सामने खाने-पीने का संकट पैदा हो गया है।
प्रशासन को इनका सर्वे करके राशन के पैकेट और आर्थिक मदद की व्यवस्था करनी चाहिए। जबकि जानकी महल, हनुमानगढ़ी, मणिराम छावनी ,राम बल्लभाकुंज , आदि बड़े मंदिरों में भंडारे की व्यवस्था चल रही है।
क्योंकि ये मठ मंदिर अपने बल पर भंडारे की व्यवस्था करने में सक्षम हैं।वहीं, छोटे मंदिरों मे रहने वाले साधु संतों के लिए खाने-पीने का संकट बरकरार है। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया की जिन मंदिरों में पुजारी के लिए आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हुई है।
उनके खाते में 1000 हर माह भेजा जा रहा है। ऐसे करीब 200 मंदिरों का चयन प्रशासन ने किया है जहां आर्थिक मदद के साथ राशन सामग्री की भी व्यवस्था प्रशासन कर रहा है।
source https://www.bhaskar.com

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