लॉकडाउन के बीच दिख रही बे- बसी: छोटे बच्चों व महिलाओं संग 6 दिन पैदल चलकर दिल्ली से पहुंचे प्रयागराज
उत्तर प्रदेश की नहीं पूरा देश कोरोनावायरस की चपेट में आ चुका है। इससे बचाव के लिए लाकडाउन की कार्रवाई हालांकि बीमारी से बचने के लिए की गई थी लेकिन यही कार्रवाई अब दिहाड़ी मजदूरों पर भारी पड़ रही है।सबसे ज्यादा प्रभावित वे प्रवासी मजदूर हैं जो पत्नी बच्चों के साथ सैकड़ो कोस दूर रोजी-रोटी की तलाश में गए थे और अब काम बंद हो जाने के चलते वापस लौटना पड़ रहा है।सिर पर सामानों की पोटली साथ में छोटे बच्चे और बुजुर्ग महिलाएं। घर तक पहुंचने के वाहन औरखाने-पीने की दुकानें बंद, रास्ते में पुलिस की फटकार और कहीं-कहीं तो मार भी झेल कर चलने की मजबूरी है।
रीवा मध्य, मध्य प्रदेश के मऊगंज निवासी रामशिरोमणि, जवाहिर, झल्लू , पुरुषोत्तम, अपने-अपने परिवारों के साथ दिल्ली में पिछले दो साल से एक बिल्डर के साथ मजदूरी कर रहे थे। बिल्डर ने काम बंद कर दिया, बकाया मजदूरी में से कुछ का भुगतान किया। बाकी के लिए कहा कि जब काम खुलेगा तब देंगे। काम बंद होने से चारों परिवार छोटे-छोटे बच्चों और 5 महिलाओं के साथ पैदल ही घर के लिए निकल दिए।
दिल्ली से प्रयागराज पहुंचने में लगे 6 दिन

दिल्ली से यहां तक का सफर तय करने में इन्हें छह दिन लग गए। वहीं शनिवार को घूरपुर पहुंचे राम शिरोमणि ने बताया रास्ते में न तो खाने-पीने की कोई दूकान खुली मिलीं और न ही कोई साधन। हम लोग तो जैसे तैसे झेल रहे हैं, लेकिन छोटे बच्चे और बुजुर्ग महिलाओं का हाल देख कर रुलाई आ जाती है।
इसी प्रकार चित्रकूट जनपद के अरवारी गांव के राम नगीना, मीरु, विट्ठल, अतरैला के शुकुरु, भीम, राबहोर समेत आसपास गांवों के सैकड़ों मजदूर परिवार समेत मजदूरी करने सूरत गए थे। अब सभी घर लौटते समय इसी तरह परेशान हो रहे हैं। बड़ा गांव के राजकरन आदिवासी ने बताया कि अकेले उनके गांव से 22 परिवार सूरत में अलग-अलग जगहों पर काम कर रहे थे, काम बंद हो जाने से सभी के सामने ऐसे ही स्थिति आ गई है।

इसी तरह राम प्रताप के अनुसार चित्रकूट जनपद के कोलहाई, बैकुंठपुर , कल्चिहा, समेत उनके क्षेत्र के कई गांवों के सैकड़ों मजदूर परिवार क्षेत्र में खनन का कार्य बंद हो जाने के कारण प्रयागराज में मजदूरी के लिए आए थे। अब सभी लोग घर लौटते समय इसी तरह की परेशानी उठा रहे है।
source https://www.bhaskar.com

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