खेती की हर समस्या का एक समाधान [Waste Decomposer]
देश के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा [कल्चर] का निर्माण किया है जिससे खेती,फसल कि सभी समस्याओं का समाधान इस दवा से होगा I इस दवा का नाम है (waste decomposer).पहले जानते हैं कि खेती की मुख्य-मुख्य समस्याएं क्या हैं I
1. खाद
2. भूमि की उर्वरा शक्ति और मिटटी का स्वास्थ्य
3. कीट-पतंगों से फसल कि सुरक्षा तथा कीटनाशक
4. बीज शोधन
5. फसल के अपशिष्ट का निवारण
6. खेती पर खर्च
waste-decomposer [अपशिष्ट-अपघटक] क्या है ?
वेस्ट डीकम्पोज़र देसी गाय के गोबर से निकाला गया सूक्ष्म जीवों [वैक्टीरिया] का संघ है जिसमे सभी प्रकार के कार्बनिक पदार्थो के अपघटक सूक्ष्म जीव सम्मिलित होते है. जिसे राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा बड़ी मेहनत से बनाया गया है I यह ठोस जैली के रूप में एक शीशी में 30 ग्राम की मात्रा में किसानों को उपलव्ध कराया जाता है I खेती में स्तेमाल के लिए इसका घोल तैयार किया जाता है I
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[Waste Decomposer] |
घोल कैसे तैयार करें ?
डीकंपोजर घोल तैयार करने के लिए सबसे पहले हम 2 किलो गुड़ लेकर 200 लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक के ड्रम में करीब 50 लीटर पानी लेकर गुड़ को पानी में अच्छी तरह घोल देते हैं उसके बाद ड्रम को पानी से पूरा भर देते हैं I
अब वेस्ट डीकम्पोजर की 1 बोतल लें जो की 30 ग्राम की होती है, उसको हम पानी में जिसमे गुड़ मिला हुआ रहता है, में अच्छी तरह मिलाते है। प्लास्टिक ड्रम में डीकम्पोजर डालते हुए यह सुनिश्चित करें लें की बोतल की सारी सामग्री इस गुड़ मिले हुए पानी में मिलाई जा चुकी है.I अब एक लकड़ी के डंडे को ड्रम में चलाकर बोतल कि सामग्री को अच्छी तरह मिला देते हैं तथा ड्रम को किसी ढक्कन से या किसी गत्ते से ढक देते हैं I उसके बाद हररोज सुबह-शाम ड्रम के घोल को डंडे से चलाते रहें इस तरह decomposer का घोल 5-6 दिन में तैयार हो जाता है जिसका कलर पीला गुड़ जैसा दिखने लगता है I
इस घोल को किसांन फसल पर छिडकाव या खाद बनाने तथा अनेक कृषि कार्यो के लिए स्तेमाल कर सकते हैं I
इसी घोल से दुवारा घोल तैयार किया जा सकता है अब फिरसे बोतल की दवा डालने की जरुरत नहीं है I
उपर्युक्त गठित घोल से किसान बार-बार वेस्ट डीकंपोजर घोल तैयार कर सकते हैं. इसके लिए 20 लीटर वेस्ट डीकंपोजर घोल में 2 किलोग्राम गुड़ मिलाते है और 20 लीटर पानी मिलाया जाता है.
इस प्रकार किसान जीवनभर के लिए इस वेस्ट डीकंपोजर से लगातार घोल को तैयार कर उपयोग में ले सकते है.
किसान वेस्ट डीकंपोजर घोल का 1000 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से सिचाई जल के साथ उपयोग कर सकते है या इसे बीजोपचार व पर्णीय छिडकाव द्वारा भी उपयोग में लेकर किसान अधिक लाभ कमा सकते है. वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग त्वरित कम्पोस्ट (खाद) बनाने में भी किया जा सकता है.
waste-decomposer के उपयोग
1. जल्दी से खाद तैयार करना
वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग कम्पोस्ट (खाद) बनाने में किया जाता है जिसकी विधि निम्न प्रकार है
सबसे पहले छाया में एक प्लास्टिक की चादर बिछाते है तथा उस पर 1 टन फसल अपशिष्ट[सूखे पत्ते, धान का पुवाल, भूसा आदि] फैलादेते हैं I डीकमपोजर की 20 लीटर मात्र का छिडकाव करते हैं I
इस परत के ऊपर फसल अपशिष्ट की एक और परत फैलाते है फिर से इस खाद की परत के ऊपर 20 लीटर वेस्ट डीकंपोजर घोल का अच्छी तरह छिड़काव करते है. इस प्रकार तैयार 200 लीटर वेस्ट डीकंपोजर को अपशिष्टो की 20 परतो के लिए काम में लेते है. खाद बनाने की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान व जब तक खाद बन ना जाये इसमें 60 प्रतिशत नमी बनाए रखते है. तथा इसे प्रत्येक 7 दिनों के अंतराल पर पलटते रहते है व 30 दिनों में खाद उपयोग के लिए तैयार हो जाती है.I
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2. भूमि की उर्वरा शक्ति और मिटटी का स्वास्थ्य
कृषि में रासायनिक उर्वरक, खरपतवार नाशी, कीटनाशी व रोगनाशको के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की विषाक्तता बढ़ गई जिससे बहूत से लाभदायक जीवाणु मर गए तथा भूमि अनुपजाऊ होती जा रही है I
इस बिकट समस्या से निपटने का अस्त्र हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है वह है waste decomposer [ कचरा अपघटक ]. जिसका उपयोग अपशिष्ट कचरे से खाद (कम्पोस्ट) के निर्माण में किया जाता है. यह मृदा स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ पोध संरक्षण का कार्य भी करता है.I
यह बात समझने की है कि waste decomposer से भूमि संरक्षण कैसे किया जाता है I
भूमि के अन्दर रहने वाले अनेकों तरह के सूक्ष्म जीव जिनको हम वैक्टीरिया नाम से जानते है I वो भूमि कि उर्वरा शक्ति को बनाये रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं I कार्बनिक पदार्थो का अपघटन मृदा में विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीवों द्वारा किया जाता है.
मृदा में उपस्थित ये सूक्ष्म जीवों की कई प्रजातियाँ मृत जानवरों, जीवों व सड़े गले पोधों को खाकर जीवित रहते है. इनमें से बहुत से सूक्ष्म जीव जो दिखाई नही देते है परन्तु वे मृदा में पोषक तत्वों के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है. ऐसे सूक्ष्म जीव जो मृदा में उपस्थित कार्बनिक पदार्थो का विघटन करने का काम करते है उन्हें डीकम्पोजर (अपघटक) कहते है।
वे सूक्ष्मजीवों, मृत पोधों के अवशेष, पशु अपशिस्ट और मृत जानवरों का सेवन करके पोषक तत्त्व प्राप्त करते है. जब ये जीव मर जाते तो इनके अपघटन के द्वारा ग्रहण किये गये पोषक तत्त्व मृदा में मिल जाते है जिन्हें पोधे आसानी से अवशोषित कर लेते है.
यह एक सामान्य प्रक्रिया जो मृदा में बिना कुछ किये अपने आप चलती रहती है यानि इसका कोई खर्च किसान को नही उठाना पड़ता. यानि किसान को ये भूमि संरक्षण का तरीका प्रकृति द्वारा दिया गया है I
लेकिन हमने अधिक पैदावार लेने के लिए फसलों में रासायनिक खादों का अधिक स्तेमाल करना शुरू करदिया जिससे भूमि के अन्दर के मित्र जीव जैसे वैक्टीरिया तथा केंचुए आदि मरते गये और भूमि कि उर्वरा शक्ति कम होती गयी I
अब वैज्ञानिकों ने हमें waste decomposer के रूप में ऐसा विकल्प दिया है जिसके प्रयोग से हमारी धरती फिरसे उपजाऊ बनेगी I
3.- कीट-पतंगों से फसल कि सुरक्षा तथा कीटनाशक
waste decomposer के इस घोल को फसल के ऊपर छिडकाव करके सभी प्रकार कि बिमारियों जैसे वैक्टीरिया, फफूंदी या वायरल से पैदा होती हैं उनको समाप्त किया जा सकता है I इसके लिए आपके खेत में या खेत के आस-पास पैदा हुए खरपतवार तथा नीम, धतूरा, आक के पत्तों तथा उनके फलों को काट-कुचल कर 2-3 दिन तक waste decomposer [वेस्ट डीकम्पोजर] के घोल में डालकर किसी घड़े में उसका मुह बंद करके छाया में रख देते हैं तो सभी सामिग्री के तत्व इस घोल में आजाते हैं I फिर इस घोल को छानकर फसलों पर छिड़क देते हैं I ऐसा छिडकाव हर तीसरे दिन करने से फसलों की हर बीमारी खत्म होजाती है I
किसानों को बाजार से महगी-महगी कीटनाशक दवाईयां लाने की आवश्यकता ही नहीं है I
4.बीज शोधन
इसी वेस्ट डीकम्पोजर की मदद से किसान हर प्रकार के बीजों का शोधन कर सकते हैं इसके लिए वेस्ट डीकम्पोजर की एक बोतल जो 20 रुपये कि आती है उस की दवा को 30 ग्राम गुड़ तथा थोडा पानी लेकर घोल कर बीज में अच्छी तरह से मिलादें और आधे घंटे के लिए छाया में सुखा दें उसके बाद उस बीज को खेत में बो सकते हैं I
5.फसल के अपशिस्ट का निवारण
वेस्ट डीकम्पोजर का यह स्तेमाल पर्यावरण की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है I आपने सुना होगा किस तरह से फसल काटने के बाद किसान उसके अपशिष्टों को खेत में जला देते हैं जिससे वातावरण में धुआं ही धुआं फ़ैल जाता है जोकि हवा के साथ बड़ी दूर तक फैलकर पर्यावरण के लिए चुनौती बन जाता है I
अब इसका सरल और लाभकारी उपाय वेस्ट डीकम्पोजर के रूप में किसानों को मिलगया है I पूरे खेत में अपशिष्ट के ऊपर इसके घोल को स्प्रे करदेने से वो सारा बचा हुआ अपशिष्ट, फसल के डंठल पत्ते, तथा तने आदि को डीकम्पोज करदेता है और खाद बना देता है जिससे किसान को फ्री में खाद भी मिलजाता है जो आगे आने वाली फसल को फायदा पहुंचाता है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता I
6.खेती पर खर्च
किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग किए बिना वेस्ट डीकंपोजर के उपयोग से जैविक खेती कर सकते हैं। यदि किसान खेत में वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग करता है तो उर्वरकों द्वारा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस या पोटाश देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है.
वेस्ट डीकंपोजर के उपयोग से सभी प्रकार के रसायनों, कवकनाशी और कीटनाशकों के 90 प्रतिशत उपयोग को कम करता है क्योंकि यह दोनों जड़ जनित बीमारियों और शाखाओं के रोगों को नियंत्रित करता है.
इस प्रकार हम यह निष्कर्ष निकाल सकते है कि वेस्ट डीकंपोजर एक जैविक हथियार है जो फसलों की कीट व बिमारियों से सुरक्षा करेगा तथा हर प्रकार से पोषण प्रदान करेगा. इससे किसानों का रसायनों पर होने वाला खर्च कम होगा व आमदनी बढेगी और साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा.
वेस्ट डीकम्पोजर के अन्य उपयोग
वेस्ट डीकम्पोजर के घोल को फसलों पर हर 10 दिन के अन्तराल पर केवल 4 वार छिडकाव करें तो फसल को सभी तरह की बिमारियों से बचाया जा सकता है I
खेत की मिट्टी को भुरभुरा बना देता है जिससे केंचुए धरती से ऊपर आकर खेती को फायदा पहुचाते हैं I पौधों की जड़ों को फैलने की अधिक जगह मिलती है I इसको फलों तथा सब्जियों पर भी सफलता पूर्वक स्तेमाल किया जा सकता है I
वेस्ट डीकम्पोजर को कैसे स्तेमाल करें I
छिडकाव के रूप में
वेस्ट डीकंपोजर के तेयार घोल को फसलों में पर्णीय छिडकाव के रूप में भी काम ले सकते है. इस घोल को 10 दिन के अन्तराल पर एक फसल में 4 छिडकाव कर सकते है जो कई प्रकार की बिमारियों से पोधों की सुरक्षा करता है.
सिचाई जल के साथ
सिचाई जल के साथ मिलाकर भी दिया जाता है। बूंद-बूंद सिचाई पद्धति में 200 लीटर घोल प्रति एकड़ प्रयोग में लाया जाता है.
फसल अवशेष की स्वस्थानिक कम्पोसिंटग
फसल की कटाई के बाद खेत में बचे डंठल व अन्य अवशेषों पर इस घोल का छिड़काव कर सकते है जिससे वे जल्दी सड़ जाते है.
बीज उपचार में
इस घोल द्वारा बीजोपचार कर फसलों को कई प्रकार की बीज जनित बीमारियों से बचाया जा सकता है.
वेस्ट डीकंपोजर घोल का सिचाई जल के साथ उपयोग करने से सिर्फ 21 दिनों के भीतर ही सभी प्रकार की मिट्टी (अम्लीय और क्षारीय) के जैविक और भौतिक गुणों को परिवर्तित कर सुधार हो जाता है यह सिर्फ छह महीने में ही एक एकड़ भूमि में लोखों कि संख्या में केंचुओं की आबादी उत्पन्न करने में मदद करता है.I
खेती की सभी प्रमुख समस्याओं का सस्ता समाधान वेस्ट डीकम्पोजर कि मदद से किया जा सकता है I और भूमि कि उर्वरा शक्ति को फिरसे बढ़ा देता है I
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