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Thursday, 6 February 2020

भारत का पहला हेवी वेट टारपीडो है वरुणास्त्र,

भारत का पहला हेवी वेट टारपीडो है वरुणास्त्र

पानी में छिपी पनडुब्बी पर करता है अचूक वार

डिफेंस एक्सपो 2020 में भारत में बने कई ऐसे हथियारों को प्रदर्शित किया गया है जो बेहद खास हैं। इनमें से एक है हेवी वेट टारपीडो वरुणास्त्र। यह भारत में बना पहला स्टेट ऑफ द आर्ट टारपीडो है।

यह पानी में छिपी पनडुब्बियों पर अचूक वार करता है। इसका इस्तेमाल फ्रिगेट्स, डिस्ट्रॉयर जैसे युद्धपोत के खिलाफ भी किया जा सकता है।

वरुणास्त्र को डीआरडीओ की कंपनी नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी ने विकसित किया है। भारत डायनामिक्स लिमिटेड इसका मास प्रोडक्शन कर रही है। नौ सेना ने इसके लिए ऑडर दिया है। नेवी अपने युद्धपोत को इससे लैस कर रही है ताकि पनडुब्बी के खिलाफ जंग में इस्तेमाल किया जा सके।

600 मीटर की गहराई तक मार करता है वरुणास्त्र

नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी के वैज्ञानिक अमित कुमार वर्मा ने वरुणास्त्र के बारे में कहा कि यह बेहद उन्नत टारपीडो है। टारपीडो पानी के अंदर मार करने वाले मिसाइल की तरह होते हैं। वरुणास्त्र पानी में 600 मीटर की गहराई तक मार कर सकता है।

इसका रेंज 20-25 किलोमीटर है। इसका वजन 1.6 टन है। यह अपने साथ 250 किलोग्राम विस्फोटक ले जाता है। यह टारगेट तक अधिकतम 74 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से पहुंचता है। टारपीडो के इतनी तेज रफ्तार के चलते दुश्मन के पनडुब्बी या समुद्री जहाज को बचने का मौका नहीं मिलता।

वरुणास्त्र अत्यंत ऑटोमेटिक और रिमोट कंट्रोल गाइडेंस सिस्टम से लैस है। एक बार फायर किए जाने के बाद यह अपने टारगेट का पीछा करने लगता है। टारगेट बचने के लिए दिशा बदलता है तो यह उसका पीछा करता है और उसे नष्ट करके ही रहता है। इसे पानी में आगे बढ़ने के लिए हाई एनर्जी जेएन प्रोपल्शन बैटरी से ताकत मिलती है।

भारत का पहला हेवी वेट टारपीडो है वरुणास्त्र,
हेवी वेट टारपीडो वरुणास्त्र।
टारपीडो वरुणास्त्र का पिछला हिस्सा।
वरुणास्त्र का प्रोपेलर।


source https://www.bhaskar.com

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