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Wednesday, 5 February 2020

ढांचा ढहाने के बाद अयोध्या के पूर्व राजघराने में पहुंचाई गई थी रामलला की मूर्ति;

ढांचा ढहाने के बाद अयोध्या के पूर्व राजघराने में पहुंचाई गई थी रामलला की मूर्ति; 

यहां बनवाया गया था अस्थाई मंदिर

लोकसभा में बुधवार को पीएम मोदी ने राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान कर दिया। इस ट्रस्ट में 15 सदस्यों को शामिल किया गया है। इसमें अयोध्या के पूर्व राजपरिवार के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा भी शामिलहैं।

विमलेंद्र का रामलला से गहरा नाता है। 28 सालों से देश दुनिया के श्रद्धालु जिस प्रतिमा का दर्शन करते हैं, वो विलमेंद्र के घर बने अस्थाई मंदिर की हैं। विवादित ढांचा विध्वंस के बाद विमलेंद्र ने अपने घर से रामलला की मूर्तियां भिजवाई थीं।



अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश पांडेय बताते हैं- 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन चरम पर था। अयोध्या के राजा का परिवार का कई कांग्रेसी नेताओं से जुड़ाव रहा। 1992 में कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद के ढांचे को ढहा दिया। उसके बाद अस्थायी मंदिर में रामलला की मूर्तियां स्थापित करने को लेकर बात चल रही थी। विमलेंद्र तत्कालीन केंद्र सरकार के मंत्री पीआर कुमारमंगलम केसंपर्क में थे।

विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद अयोध्या में कर्फ्यू लगा था। इसी बीच विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्राने अपने घर से रामलला की मूर्तियां मंदिर में रखने के लिए भिजवाई थी। कहा जाता है- उनकी दादी ने इसी काम के लिए अपने घर में एक अस्थाई मंदिर बनाकर उसमें मूर्तियां रखी थीं। इसके बाद ही केंद्र सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुलाकर तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी।

कमिश्नर ने सौंपा अधिग्रहितजमीन का मालिकाना हक

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर के फैसले के 88 दिन बाद सरकार ने राम मंदिर बनाने के लिए बुधवार को ट्रस्ट की घोषणा की है। ट्रस्ट का नाम ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ होगा। इसी के साथ केंद्र सरकार ने अपने कब्जे की 67.703 एकड़ जमीन भी ट्रस्ट को सौंप दी है। यह पूरा इलाका मंदिर क्षेत्र होगा। बतौर ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा ने बुधवार शाम केंद्र सरकार से जमीन का मालिकाना हक प्राप्त किया है। इसके दस्तावेज कमिश्नर ने उन्हें सौंपे हैं।

कौन हैं विमलेंद्र मोहन?

विमलेंद्र रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य व समाजसेवी हैं। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके बाद उन्होंने खुद को राजनीति से दूर कर लिया था।

ढांचा ढहाने के बाद अयोध्या के पूर्व राजघराने में पहुंचाई गई थी रामलला की मूर्ति;
अयोध्या के पूर्व राजघराने के सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र।- फाइल फोटो।


source https://www.bhaskar.com

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