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Monday, 13 January 2020

37 दिन बाद भी केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं

37 दिन बाद भी केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं

पीड़ित की बहन ने कहा- हमें सीएम से मिलने नहीं दिया जा रहा

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में जिंदा जलाई गईगैंगरेप पीड़ितकी मौत को 37 दिन बीत चुके हैं। परिवार सरकार जिला प्रशासन के एक्शन से संतुष्ट नहीं है। पीड़ित की बहन ने कहा- हमें मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया जा रहा। जब भी लखनऊ जाने की कोशिश करते हैं, जिला प्रशासन रोक लेता है।

अभी तक दीदी का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं भेजा गया है,जबकि मुख्यमंत्री ने खुद इसका आश्वासन दिया था। मैं चाहती हूं किदीदी के हत्यारों को फांसी मिले। दीदी को जिंदा जलाने वाले धमकी देते हैं।
37 दिन बाद भी केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं

कहते हैं किबयान दिया तोतुम्हारी ऐसी हालत करेंगे कि किसी लायक नहीं रहोगी। आज मुख्यमंत्री से मिलने के लिए लखनऊ जाऊंगी, अगर किसी ने रोकने की कोशिश की तो आत्मदाह कर लूंगी।


योगी से मिलने नहीं दे रहे

पीड़ित की बहन ने कहा- 5दिसंबर को मेरी बहन को जिंदा जलाया गया था।सीएम से मिलने के लिएतीन-चार बार लखनऊ जाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने रोक दिया। एक बार तो घर से निकलने ही नहीं दिया गया।

प्रकरण को दबाने की कोशिश

पीड़ित की बहन ने कहा- मैंने औरमेरे भाई ने करीब 6 बार डीएम से मुलाकात की, लेकिन सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। बस यही कहा जाता है किमामले में एक्शन हो रहा है। लेकिन क्या हो रहा है, कुछ पता नहीं। कुछ लोग इस मामले को दबाना चाहते हैं।

मांगेंपूरी नहीं हुई, रोज मिल रहीं धमकियां

पीड़ित की बहन ने यह भी कहा- सरकार ने नौकरी, मकान औरआर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया था,लेकिनअभी तक सिर्फ रुपए पिताजी के खाते में आए हैं। सरकार ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए की सहायता प्रदान की थी।मकान औरनौकरी की मांग अधूरी है।

रोज धमकियां मिल रही हैं। तीन दिन पहले राशन लेने दुकान पर गई थी, तभी बाजपेई परिवार का एक लड़का औरकुछ औरतें पीछे लगी थीं। उन लोगों ने कहा- तुमको मारेंगे तो बयान भी नहीं दे पाओगी। हर समय सुरक्षा वाले साथ नहीं होते। धमकियां ग्रामीणों के सामने दी गईं।लोग डरे सहमे हैं। इसलिए कोई खुलकर हमारा समर्थन भी नहीं करता।

क्या था मामला, अब तक क्या हुआ?

उन्नाव के बिहार इलाके में 5 दिसंबर को गैंगरेप केस की पैरवी करने के लिए पीड़ितरायबरेली कोर्ट जा रही थी। तड़केगांव के बाहरशिवम और शुभम ने तीन अन्य के साथ मिलकर पीड़ित को जला दिया था। करीब 43 घंटे के बाद पीड़ित ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था।


मरने से पहलेपीड़ितके बयान के आधार पर गांव के प्रधानपति हरिशंकर त्रिवेदी, उसके बेटे शुभम, गांव के शिवम औरउमेश बाजपेई समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

मामले की जांच एसआईटी कर रही है। घटना के 20 दिन बाद 26 दिसंबर को आरोप पत्र तैयार किया गया।एक जनवरी को कोर्ट खुलने पर पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था। तीन जनवरी को आरोपियों की पहली पेशी थीsource https://www.bhaskar.com
5 दिसंबर को रेलवे स्टेशन जाते वक्त पीड़ित को इसी जगह जिंदा जला दिया गया था। -फाइल



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