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Sunday, 26 April 2020

महाराष्ट्र से पलायन को मजबूर प्रवासी मजदूर,

महाराष्ट्र से पलायन को मजबूर प्रवासी मजदूर, 

4 दिन के सफर के बाद यूपी-एमपी सीमा से ही वापस किए गए

कोरोनावायरस से फैल रहे संक्रमण के बाद उपजे संकट के मद्देनजर देशव्यापी लॉक डाउन के बीच महाराष्ट्र में फंसे यूपी के लाखों प्रवासी मजदूर वाहनों में छिपकर अपने घर लौट रहे हैं।

 रास्ते में कई बार पुलिस चेकिंग का सामना करते हुए यूपी-एमपी बॉर्डर तक पहुंच गए। इतना लंबा सफर तय करने के बाद जब वे यूपी बॉर्डर पर पहुंचे तो जनपद पुलिस ने उन्हें वापस लौटा दिया गया।

मजदूरों का कहना है कि महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश तक पुलिस ने हमें देखा और आगे जाने दिया।

वहीं सिद्धार्थनगर के ही रहने वाले इमरान और उसके तमाम साथी अपनी बाइक से 5 दिन का सफर करके यूपी बॉर्डर पर पहुंचे। कई मजदूर अपने परिवार के साथ सफर पूरा कर रहे हैं। उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी इस परेशानी का सामना कर रहे हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो पा रहा पालन

प्रवासी मजदूर कंटेनर, ट्रक, मैजिक, लोडर गाड़ी और बाइक से अपने घरों के लिए वापस आ रहे हैं. गाड़ियों में वे अधिक संख्या में बैठ रहे हैं और उन्हें छिपाने के लिए ऊपर से त्रिपाल या किसी अन्य वास्तु से ढक दिया जाता है. जिसके चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है और इतनी गर्मी में इस तरह से सफर करना उनके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।मजदूर बोले नहीं मिल रहा था खाना

रामकृपाल सिद्धार्थनगर के रहने वाले वे मुंबई में दैनिक मजदूरी करने के लिए गए थे। आपबीती सुनाते हुए कहते हैं कि वहां हमें भूखा रहना पड़ रहा था। हमने लॉक डाउन से पहले जो थोड़ा बहुत रुपया कमाया था।

 उसी से सामान लेकर अपना पेट भरते थे। हम वहां बहुत परेशान थे इसके बाद हमें अपने गांव की एक गाड़ी मिल गई। हम सब ने मिलकर इसमें डीजल डलवाया और अपने गांव के लिए निकल आए।

दरअसल, यूपी का झांसी ऐसा जनपद है जिसकी 3 सीमाएं मध्य प्रदेश से मिलती हैं। यहां हर रोज दूसरे राज्यों से पलायन करके हजारों मजदूर वाहनों में छिपकर पहुंच रहे हैं। इन प्रवासी मजदूरों का पलायन पुलिस प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। पुलिस लगातार इनके वाहनों को बॉर्डर से वापस कर रही हैं।

वापस होने के बाद मजदूर खेतों में छिपकर बैठ जाते हैं और रात होने का इंतजार करते हैं। जैसे ही रात होती है ये आसपास के खेतों से होते हुए यूपी की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद जिला प्रशासन को इन्हें क्वॉरेंटाइन करना पड़ता है।

महाराष्ट्र से पलायन को मजबूर प्रवासी मजदूर,
महाराष्ट्र से झांसी के लिए ये मजदूर चार दिनों पहले ही निकले थे लेकिन उन्हें रास्ते में कहीं रोका नहीं गया। ऐसा उनका कहना है। लेकिन झांसी के बार्डर पर पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें वापस लौटा दिया।


source https://www.bhaskar.com

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