राज्य कर्मचारियों के 6 तरह के भत्तों को रोकने पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए की बचत का अनुमान,
अलग-अगल ग्रेड पे के हिसाब से होगी कटौती
लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने कोविड19 महामारी में लॉकडाउन घोषित होने के बाद राज्य सरकार ने छह तरह के भत्ते पर रोक लगा दी हैं। राज्य कर्मचारियों के 6 तरह के भत्तों पर 31 मार्च 2021 तक स्थगित कर दिया गया हैं।इसमें मंहगाई भत्ता विभागीय भत्ते, सचिवालय भत्ता, पुलिस भत्ता भी शामिल हैं। इससे यूपी में 16 लाख से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित होंगे। वहीं 11.82 लाख पेंशनरों को झटका लगा है।
आर्थिक तंगी का सामना कर रही राज्य सरकार को कर्मचारियों के महंगाई भत्ते व महंगाई राहत पर फैसला लेने से करीब 10 हजार करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान हैं। वहीं इस कटौती का विरोध पेंशनर यूनियन और कर्मचारियों नेताओं ने किया है।
ये हैं छह भत्ते जिसको किया गया हैं रद्द
- नगर प्रतिकर भत्ता: नगर प्रतिकर भत्ते को ग्रेड-पे में 1300 से 1800 ग्रेड-पे के कर्मचारियों को लेवल-1, 1900 से 2000 तक के ग्रेड पे वाले कर्मचारियों को लेवल-2 से लेवल-5 तक, 4200 से 4800 ग्रेड-पे वाले कर्मचारियों को लेवल-6 से लेवल-8 और 5400 से अधिक ग्रेड-पे वाले कर्मचारियों को लेवल-9 और ऊपर के लेवल में रखा गया है। इसमें शहर के हिसाब से 300 रुपये से लेकर 800 रुपये भत्ता मिलता हैं। अनुमान में करीब 80 करोड़ रुपये प्रत्येक माह यूपी में खर्च होते हैं।
- सचिवालय भत्ता: करीब आठ हजार कर्मचारियों को मिलने वाला यह भत्ता 500 रुपया मिलता है।
- पुलिस विभाग में अपराध शाखा, अनुसंधान विभाग, भ्रष्टाचार निवारण, सतर्कता अधिष्ठान, सुरक्षा शाखा एवं विशेष जांच शाखा में तैनात पुलिस कर्मियों में कटौती
- अवर अभियन्ता को अनुमान्य भत्ता
- लोक निर्माण विभाग में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अनुमान्य रिसर्च भत्ता
- सिचांई विभाग में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों आई एंड पी भत्ता एवं अर्दली भत्ता
आदेश को वापस लेने और विचार करना चाहिए
सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र का कहना है राष्ट्रीय आपदा में कर्मचारी आर्थिक सहयोग प्रदान करने में पीछे नहीं है। मंहगाई भत्ते की फ्रीजिंग पर उसे अधिक आपत्ति नहीं थी लेकिन 6 भत्तों को मार्च, 2021 तक स्थगित करने से कर्मचारी जगत में काफी नाराजगी व्यक्त की है।वित्त विभाग के अधिकारी सरकार और कर्मचारी संगठनों को आमने सामने करने से बाज नहीं आ रहे हैं। मिश्र ने भत्तों के स्थगन संबंधी आदेश को वापस लेने पर सरकार को विचार करना चाहिए।
चपरासी की सैलरी से भत्ता कटने से तीन हजार सरकार को मिलेंगे: वित्त विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि, उत्तर प्रदेश में चपरासी की सैलरी का अनुमान करीब 30 हजार रुपये के आस पास हैं। इसमें करीब 2500 से 3000 रुपए की कटौती होगी। सीनियर और जूनियर के हिसाब से भत्ते में कटौती भी होगी। इसी तरह प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों की सैलरी के हिसाब कटौती की जाएगी।
source https://www.bhaskar.com

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