4 हजार से अधिक शौचालय बनाने वाली कानपुर की कलावती को राष्ट्रपति ने दिया नारी शक्ति पुरस्कार
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली कलावती देवी को नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया है। 58 वर्षीय कलावती देवी पेशे से राजमिस्त्री हैं।उन्होंने अब तक 4000 से अधिक शौचालय अपने हाथों से बनाए हैं। कानपुर को खुले में शौच से मुक्त बनाने में कलावती ने अहम योगदान दिया है। पति व दामाद की मौत के बाद भी कलावती का हौसला नहीं टूटा। परिवार में कमाने वाली कलावती इकलौती सदस्य हैं। वे खुले में शौच से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए घर-घर जाती हैं।
दो दशक पहले एक स्थानीय एनजीओ ने राजा का पुरवा में शौचालय निर्माण के लिए पहल शुरू की, जिससे कलावती जुड़ गईं। कलावती को राजमिस्त्री का काम आता था। इसलिए उन्होंने मोहल्ले का पहला सामुदायिक शौचालय बनाया। कलावती की मानें तो यह आसान नहीं था। लोग इस काम के लिए ताना मारते थे।
मोहल्ले में लोग जमीन खाली करने के लिए राजी नहीं थे। लोगों को शौचालय की जरूरत समझ में नहीं आ रही थी। लेकिन, काफी समझाने के लिए लोग राजी हुए। बाद में तत्कालीन नगर निगम के आयुक्त से दूसरे स्लम बस्तियों में शौचालय निर्माण कराने का प्रस्ताव रखा। अधिकारी प्रयासों से सहमत हुए। अधिकारियों ने प्रस्ताव रखा- यदि मोहल्ले के लोग शौचालय की कुल लागत का एक तिहाई खर्च उठाने को तैयार हो जाएं तो दो तिहाई पैसा सरकारी योजना के तहत लिया जा सकता है।
कई बार के समझाने के बाद दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चलाने वाले लोगों ने पैसे का इंतजार किया। इसके बाद चीजें व परिस्थितियां बदलने लगी। इसके बाद कलावती ने अपने हाथों से 50 से अधिक सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया। धीरे-धीरे यह काम कलावती के लिए जुनून बन गया।
कलावती के पति की मौत हो चुकी है। बेटी और उसके दो बच्चे भी साथ रहते हैं। कारण दामाद की मौत हो चुकी है। तमाम तरह की दुश्वारियों के बाद भी कलावती ने समाज की बेहतरी के लिए शौचालय निर्माण कार्य जारी रखा। 58 साल की उम्र में कलावती 4000 से अधिक शौचालय बना चुकी हैं।
source https://www.bhaskar.com

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