पद्मश्री से सम्मानित साहित्यकार गिरिराज किशोर का कानपुर में निधन, '
पहला गिरमिटिया' उपान्यास से हुए थे लोकप्रिय
मशहूर साहित्यकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित गिरिराज किशोर का रविवार सुबह उनके निवास पर निधन हो गया। मूलरूप से मुजफ्फरनगर निवासी गिरिराज किशोर लंबे समय से कानपुर में रह रहे थे। वह 83 वर्ष के थे। गिरिराज किशोर हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार होने के साथ-साथ कथाकार, नाटककार और आलोचक भी थे।बिहार के साहित्यकार को कंधे पर गमछा रखने के कारण दिल्ली के रेस्तरां में घुसने से रोका, विरोध में उतरे डेढ़ लाख लोग
कस्तूरबा गांधी पर भी लिखा था उपान्यास
महात्मा गांधी के बाद गिरिराज किशोर ने कस्तूरबा गांधी पर आधारित उपन्यास 'बा' लिखा था। इसमें उन्होंने गांधी जैसे व्यक्तित्व की पत्नी के रूप में एक स्त्री का स्वयं और साथ ही देश की आजादी के आंदोलन से जुड़ा दोहरे संघर्ष के बारे में बताया था। वह साहित्यकार होने के साथ-साथ आईआईटी कानपुर के कुलसचिव भी रह चुके हैं।आईआईटी कानपुर में ही उन्होंने 1983 से 1997 के बीच रचनात्मक लेखन केंद्र की स्थापना की और उसके अध्यक्ष रहे। जुलाई 1997 में वह रिटायर हो गए। इस दौरान भी उनका अपना लेखन कार्य और महात्मा गांधी पर रिसर्च जारी रखा।
source https://www.bhaskar.com

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