
दो फिल्मों का स्क्रीनप्ले लिखा था, उसके पैसे अब तक नहीं मिले
बॉलीवुड डेस्क. गोवा में चल रहे भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (आईएफएफआई) के दूसरे दिन 'भूतनाथ रिटर्न्स', 'दंगल' और 'छिछोरे' जैसी फिल्मों के डायरेक्टर नितेश तिवारी ने मंच साझा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे जो भी सीखे हैं, खुद से ही सीखे हैं। तिवारी ने यह भी बताया कि फिल्मों में बतौर डायरेक्टर आने से पहले उन्होंने दो फिल्मों का स्क्रीनप्ले लिखा था, लेकिन उन्हें अब तक उसके पैसे नहीं मिले।
पहली सैलरी से खरीदी थी टीवी: नितेश
नितेश कहते हैं, "मैं तो आत्म शिक्षित फिल्मकार हूं। मैंने ज्यादातर खुद से ही सीखा है। आईआईटी की इसलिए छोड़ा था, क्योंकि मुझे लिखने का शौक था। शायद किसी को पता नहीं कि मैंने पहली सैलरी से टीवी, दूसरी से वीसीआर और तीसरी से शेमारू की मेंबरशिप ली थी। मेरी पहली सैलरी दस हजार रुपए की थी। उसमें से 800 रुपए की तो डीवीडी ही खरीद ली थी।"
दोस्त मनीष ने दिया था 'दंगल' का आइडिया
बकौल नितेश, "मैं खुश हूं, कि 'चिल्लर पार्टी' जैसी फिल्म से मेरे डायरेक्शन की शुरूआत हुई थी। उससे पहले मैंने दो फिल्मों का स्क्रीनप्ले लिख लिया था, मगर उसके पैसे अभी तक नहीं मिले। इसके बाद 'दंगल' का आइडिया डिज्नी में मेरे दोस्त मनीष ने दिया था। रिसर्च के बाद पता चला कि उनके पिता की भी शानदार यात्रा रही है। जब आमिर को फिल्म की कहानी सुनाई थी तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।"
source https://www.bhaskar.com
पहली सैलरी से खरीदी थी टीवी: नितेश
नितेश कहते हैं, "मैं तो आत्म शिक्षित फिल्मकार हूं। मैंने ज्यादातर खुद से ही सीखा है। आईआईटी की इसलिए छोड़ा था, क्योंकि मुझे लिखने का शौक था। शायद किसी को पता नहीं कि मैंने पहली सैलरी से टीवी, दूसरी से वीसीआर और तीसरी से शेमारू की मेंबरशिप ली थी। मेरी पहली सैलरी दस हजार रुपए की थी। उसमें से 800 रुपए की तो डीवीडी ही खरीद ली थी।"
दोस्त मनीष ने दिया था 'दंगल' का आइडिया
बकौल नितेश, "मैं खुश हूं, कि 'चिल्लर पार्टी' जैसी फिल्म से मेरे डायरेक्शन की शुरूआत हुई थी। उससे पहले मैंने दो फिल्मों का स्क्रीनप्ले लिख लिया था, मगर उसके पैसे अभी तक नहीं मिले। इसके बाद 'दंगल' का आइडिया डिज्नी में मेरे दोस्त मनीष ने दिया था। रिसर्च के बाद पता चला कि उनके पिता की भी शानदार यात्रा रही है। जब आमिर को फिल्म की कहानी सुनाई थी तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।"
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